कार्यपालिका सरकार का एक महत्वपूर्ण अंग है। व्यवस्थापिका द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना कार्यपालिका का कार्य है।
संविधान के अनुसार केंद्र सरकार की कार्यपालिका में भारत का राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद तथा अनेक सरकारी कर्मचारी सम्मिलित हैं।राष्ट्रपति
राष्ट्रपति भारत के शासन का प्रमुख होता है। यह देश का प्रथम नागरिक एवं सर्वोच्च अधिकारी होता है। संपूर्ण देश का शासन उसी के नाम से चलाया जाता है। राष्ट्रपति का पद राष्ट्रीय गरिमा एवं राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।योग्यताएं
- इस पद के उम्मीदवार में निम्न योग्यताएं होना आवश्यक है-- वह भारत का नागरिक हो।
- वह 35 वर्ष या इससे अधिक आयु का हो
- वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यताएं रखता हो
कार्यकाल
राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। यदि राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करें तो संसद द्वारा महाभियोग लगाकर समय से पूर्व पद से हटाया जा सकता है।राष्ट्रपति का चुनाव
राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से जनता के प्रतिनिधियों के द्वारा किया जाता है। इसके चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।राष्ट्रपति की शक्तियां
राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रधान होने के कारण उसे व्यवस्थापिका कार्यपालिका एवं न्यायपालिका संबंधी शक्तियां प्राप्त हैं। वह समस्त शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह से करता है। राष्ट्रपति की दो प्रमुख शक्तियां हैं--- सामान्य शक्तियां
कार्यपालिका संबंधी--
- शासन का समस्त कार्य राष्ट्रपति के नाम से होता है।
- वह महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की नियुक्ति करता है, जैसे प्रधानमंत्री, अन्य मंत्री, विदेशों में भारतीय राजदूत, राज्यपाल, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यगण मुख्य चुनाव आयुक्त आदि।
- वह भारत की तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति होता है।
- दूसरे देशों के साथ युद्ध और संधि की घोषणा करता है।
- विदेशों से भारत आने वाले राजपूतों का स्वागत करता है।
व्यवस्थापिका संबंधी-
कार्यपालिका के प्रधान होने के साथ ही राष्ट्रपति व्यवस्थापिका का अभिन्न अंग है। इस रूप में उसे निम्नांकित शक्तियां प्राप्त हैं-
- वह संसद का अधिवेशन बुलाता है, सत्रावसान करता है, लोकसभा को भंग कर सकता है, दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करता है।
- संसद का अधिवेशन नहीं चल रहा हो तो अध्यादेश जारी कर सकता है।
- संसद द्वारा पास विधेयकों पर स्वीकृति देता है या उन्हें पुनः विचार हेतु लौटा सकता है।
- राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही कोई विधेयक कानून बन सकता है।
- राज्यसभा में 12 सदस्यों का मनोनयन करता है।
वित्त संबंधी -
प्रत्येक वित्तीय वर्ष के आरंभ में संसद के दोनों सदनों के सम्मुख आय-व्यय का अनुमानित विवरण मंत्रिपरिषद द्वारा प्रस्तुत करवाता है।
- वित्त विधेयक प्रस्तुत करने के पूर्व राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है।
- देश की आकस्मिक निधि में से विशेष परिस्थितियों में व्यय करने का अधिकार है जैसे युद्ध बाढ़ आदि।
न्याय संबंधी-
वह न्यायालय द्वारा मृत्यु दंड से दंडित व्यक्ति को क्षमा दान दे सकता है या दंड को कम कर सकता है।
वह सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
संकटकालीन शक्तियां-
संविधान द्वारा तीन स्थितियों में राष्ट्रपति को संकट काल की घोषणा करने का अधिकार दिया गया है-
- देश की सुरक्षा को खतरा, बाहरी आक्रमण या आंतरिक सशस्त्र विद्रोह होने पर संकट काल की घोषणा कर सकता है।
- किसी राज्य की संवैधानिक व्यवस्था विफल हो जाने पर संकट काल की घोषणा कर सकता है।
- देश में वित्तीय संकट होने की स्थिति में वित्तीय संकट काल की घोषणा कर सकता है।
उपराष्ट्रपति-
राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। इसका चुनाव संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है।
योग्यताएं
- वह भारत का नागरिक हो।
- वह 35 वर्ष या उससे अधिक आयु का हो।
- वह राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।
कार्यकाल
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। उपराष्ट्रपति के कार्य एवं अधिकार वह राज्यसभा का सभापति होता है। राष्ट्रपति का पद रिक्त होने या उसकी अनुपस्थिति में स्थाई रूप से राष्ट्रपति का कार्य करता है।
मंत्रिपरिषद
हमारे संविधान में शासन संचालन में राष्ट्रपति की सहायता के लिए एक मंत्री परिषद की व्यवस्था की गई है।
आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है ।राष्ट्रपति उसे हो प्रधानमंत्री नियुक्त करता है जो लोकसभा के बहुमत दल का नेता हो यानी जिसे लोकसभा की आधे से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो। प्रधानमंत्री की सलाह से ही राष्ट्रपति मंत्री परिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है ।मंत्रिपरिषद के सदस्य तीन प्रकार के होते हैं-
आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है ।राष्ट्रपति उसे हो प्रधानमंत्री नियुक्त करता है जो लोकसभा के बहुमत दल का नेता हो यानी जिसे लोकसभा की आधे से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो। प्रधानमंत्री की सलाह से ही राष्ट्रपति मंत्री परिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करता है ।मंत्रिपरिषद के सदस्य तीन प्रकार के होते हैं-
- कैबिनेट स्तर के मंत्री
- राज्य स्तर के मंत्री
- उप मंत्री
प्रधानमंत्री
राष्ट्रपति लोकसभा के बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है। शासन संचालन के लिए प्रधानमंत्री मंत्री परिषद का गठन करता है। मंत्रियों के विभागों का विभाजन करता है। उसके नेतृत्व में मंत्री परिषद के समस्त सदस्य आपसी सहयोग से कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री मंत्री परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है ।शासन संचालन संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय करता है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी का काम करता है। मंत्री परिषद का मुखिया होने के कारण उसे कार्यपालिका संबंधी महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त हैं।मंत्री परिषद के कार्य एवं शक्तियां
- यह देश की समस्त नीतियों को निर्धारित करती है।
- विभिन्न विभागों के अध्यक्ष के रूप में मंत्री अपने विभाग के कुशल प्रशासन के लिए जिम्मेदार होते हैं। सभी विभागों का प्रशासन मंत्री परिषद की देखरेख में चलता है।
- राष्ट्रपति समस्त कार्यों का संपादन मंत्री परिषद के परामर्श से ही करता है।
- यह विभिन्न सरकारी नीतियों एवं विभागों के कार्य में उचित समन्वय करती है।
राज्य सरकार
राज्य के कानून विधान मंडल द्वारा बनाए जाते है। यह कानून राज्यों में राज्य कार्यपालिकाओं द्वारा लागू किए जाते है। राज्य कार्यपालिका राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उसकी मंत्री परिषद तथा राज्य स्तर की लोक सेवा में कार्यरत व्यक्तियों से मिलकर बनती है।
राज्यपाल
राज्यपाल राज्य का प्रमुख होता है। उसी के नाम से राज्य का शासन चलता चलाया जाता है। सरकार के सभी कार्य उसी के नाम से किए जाते हैं।
राज्यपाल की नियुक्ति
राज्यपाल की नियुक्ति देश के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। राष्ट्रपति राज्यपाल की नियुक्ति से पूर्व प्रधानमंत्री से विचार-विमर्श करता है।
राज्यपाल के लिये योग्यताएं-
- वह भारत का नागरिक हो।
- किसी लाभ के पद पर नहीं हो।
- संसद या विधान मंडल का सदस्य न हो।
राज्यपाल की शक्तियां-
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक मुखिया होता है।
- कार्यपालिका संबंधी शक्तियां-
- व्यवस्थापिका संबंधी-
राज्यपाल राज्य व्यवस्थापिका का अभिन्न अंग है। विधान मंडल द्वारा पारित कानूनों को राज्य में लागू करवाता है। वह विधान सभा का अधिवेशन बुलाता है, स्थगित कर सकता है, आवश्यकता होने पर विधानसभा भंग भी कर सकता है। विधान मंडल द्वारा पारित विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक है। राज्य के शासन के संबंध में समय-समय पर राष्ट्रपति को जानकारी देता है। आवश्यकता पड़ने पर अध्यादेश जारी कर सकता है।
- वित्तीय शक्तियां-
धन विधेयक प्रस्तुत करने से पहले राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक है। प्रति वर्ष राज्य के आय व्यय का बजट तैयार करवाकर विधानसभा में प्रस्तुत करवाता है। राज्य की संचित निधि पर राज्यपाल का अधिकार होता है जिसे वह बाढ़, भूकंप, युद्ध आदि में व्यय कर सकता है।
- न्यायिक शक्तियां-
यदि राज्यपाल यह महसूस करे कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चल पा रहा है तो वह राष्ट्रपति से राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकता है।
राज्य मंत्री परिषद
राज्य की मंत्रिपरिषद ही राज्य की वास्तविक कार्यपालिका है। राज्यपाल के नाम पर मंत्री परिषद ही शासन की समस्त शक्तियों का उपयोग करती है। जिसका मुखिया मुख्यमंत्री होता है। मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों को विधानसभा का सदस्य होना जरूरी है। मंत्री परिषद में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री तथा संसदीय सचिव सम्मिलित होते हैं। इन मंत्रियों तथा सचिवों को मिलाकर मंत्री परिषद का गठन होता है। सभी मंत्री व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदाई होते हैं।
मुख्यमंत्री
राज्यपाल राज्य विधानसभा के बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है। शासन संचालन के लिए मुख्यमंत्री एक मंत्री परिषद का निर्माण करता है। मंत्रियों के विभागों का विभाजन करता है। मंत्री परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है एवं शासन संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेता है। मुख्यमंत्री राज्यपाल एवं मंत्री परिषद के बीच एक कड़ी का काम करता है। इस प्रकार मंत्री परिषद का मुखिया होने के कारण उसे कार्यपालिका संबंधी महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त हैं।
राज्य मंत्री परिषद के कार्य
ये राज्य महत्व के मामलों पर नीति निर्धारण करते हैं। विभिन्न विभागों के अध्यक्ष के रूप में मंत्री अपने विभाग के कुशल प्रशासन के लिए जिम्मेदार होता है। सभी विभागों का प्रशासन मंत्री परिषद की देखरेख में चलता है। राज्यपाल समस्त कार्यों का संपादन मंत्री परिषद के परामर्श से करता है। राज्य के वित्त पर पूरा नियंत्रण रखकर विकास कार्यों का संचालन करना मंत्री परिषद का कार्य है।
राज्य के शासन संचालन में मंत्री परिषद का महत्वपूर्ण स्थान है। राज्यपाल के जो भी अधिकार एवं कार्य हैं उनका प्रयोग व्यवहार में मंत्री परिषद एवं मुख्यमंत्री के द्वारा किया जाता है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक अध्यक्ष है जबकि मंत्री परिषद एवं मुख्यमंत्री राजे के वास्तविक शासक हैं।
लोक सेवकों की भूमिका
लोक सेवकों का लोकतंत्र के शासन में विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री तथा मंत्री परिषद नीति निर्धारण करते हैं। राज्यपाल उन्हें स्वीकृति देता है। परंतु इन निर्णय उसको कौन लागू करता है? यहां लोक सेवाएं अपनी भूमिका निभाती हैं जैसे राज्य में कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी किसी एक मंत्री के अधीन होती है। मंत्रियों के पास इस कार्य को करने के लिए सरकारी लोकसेवक होते हैं। इसी प्रकार अन्य लोक सेवक होते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे यातायात वन तथा करारोपण आदि के लिए कार्य करते हैं। यह सभी प्रशासनिक अधिकारी मंत्री परिषद द्वारा निर्धारित नीतियों एवं निर्देशों के अनुसार देश एवं राज्य का शासन संचालित करते हैं। यह आवश्यक है कि सरकारी सेवाओं में योग्य, कुशल एवं ईमानदार व्यक्तियों को स्थान दिया जाए।
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